गर मरी हुई पत्नी जिंदा है तो पति को जेल क्यों,, सनसनीखेज पूरा खुलासा जानिए

मरी हुई पत्नी जिंदा हो गई.फिर पति जेल में क्यों था? क्या है कंकाल का अनसुलझा रहस्य

मैसूर: कर्नाटक में एक महिला को पिछले पांच सालों से लोगों ने मृत मान लिया था. अब वह महिला जीवित पाई गई है.यह पूरा केस किसी सस्पेंस थ्रिलर पिक्चर से कम नहीं है। क्योंकि दुनिया के नजरों में मर चुकी उस महिला की हत्या के आरोप में उसका पति पिछले दो साल से जेल में बंद था।

जब जेल में बंद शख्स को इस बात की जानकारी हुई तो वह हक्का बक्का रह गया।. वहीं, इस खुलासे ने अब पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।, जिसके कारण एक निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से जेल भेजा गया।

बताया जाता है कि
18 साल पहले शख्स का विवाह हुआ था।. शादी के बाद दंपति के दो बच्चे हुए। उसके बाद अचानक से शख्स की पत्नी लापता हो गई। पति ने इसकी रिपोर्ट थाने में दी।. 1 अप्रैल को मदिकेरी के एक होटल में दोस्तों के साथ चाय पीते समय आपराधिक मामले के 7वें गवाह ने एक महिला को देखा,जिसका चेहरा हूबहू जेल में सजा काट रहे शख्स की मृत पत्नी से मिलता-जुलता था।

वह अपने कथित प्रेमी के साथ नाश्ता कर रही थी। तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया।. पुलिस पूछताछ में शख्स की पत्नी ने बताया कि,वह पिछले पांच सालों से अपने दोस्त के साथ रह रही थी।

कंकाल का डीएनए टेस्ट

पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट रहे शख्स के वकील पांडू पुजारी ने कंकाल का डीएनए टेस्ट कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। नतीजों से पुष्टि हुई कि अवशेष शख्स की पत्नी के नहीं थे। इस महत्वपूर्ण सबूत के बाद भी आरोपी शख्स तब तक सलाखों के पीछे रहा जब तक उसे हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिल गई।

खबर के मुताबिक, 2020 में शख्स की पत्नी लापता हो गई थी. पति ने पुलिस स्टेशन में पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सात महीने बाद जून 2021 में बेट्टाडापुरा पुलिस ने एक महिला कंकाल की खोज की और रिश्तेदारों से उसके अवशेषों की पहचान करने और उसके बारे में जानकारी मांगने के लिए एक नोटिस जारी किया।
अधिवक्ता पांडू पुजारी के मुताबिक,पुलिस ने उसके बाद उसे गिरफ्तार किया और आईपीसी की धारा 201, 498 और 302 के तहत आरोपित किया, जिसमें उस पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगाया गया।

जेल में सजा काटने वाले शख्स के वकील ने कहा कि, उनके मुवक्किल द्वारा अपनी पत्नी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद, पुलिस ने उसके खिलाफ कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और उसकी सास के बयानों सहित बयानों के आधार पर आरोप पत्र दायर किया।

एडवोकेट पुजारी ने कहा कि, बरामद शव का डीएनए टेस्ट किया गया था लेकिन परीक्षण के परिणाम आने से पहले ही पुलिस ने मेरे मुवक्किल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। जिसका नतीजा यह हुआ कि,उनके मुवक्किल को दो साल जेल में बिताने पड़े। मुवक्किल की जमानत शुरू में खारिज कर दी गई थी। वकील ने कहा कि, उनके मुव्क्किल की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा।

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कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच

पत्नी के जिंदा मिलने के बाद, मामला मैसूर के पांचवें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष लाया गया। जज ने मामले को गंभीरता से लिया और मैसूर के एसपी तथा बेट्टाडापुरा पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को नोटिस जारी कर उन्हें अदालत में पेश होने को कहा। मैसूर के एसपी एन विष्णुवर्धन ने पुष्टि की कि मामले से संबंधित सभी विवरणों की समीक्षा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि, यह एक असामान्य मामला है। परिवार ने शव की पहचान कर ली है और अंतिम संस्कार कर दिया गया है। हम अदालत को सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएंगे।” अदालत ने अब जिला पुलिस को महिला को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है और उसे राज्य महिला गृह में रखा है।
इसके अलावा, न्यायाधीश ने कंकाल की गलत पहचान और पुलिस द्वारा महिला के पति से जबरन कबूलनामा करवाने की संभावना की गहन जांच का आदेश दिया है।

वकील पुजारी के अनुसार, जब पुलिस ने शख्स की पत्नी को अदालत में पेश किया तो उसने सच्चाई उजागर कर दी।. इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने एसपी को पेश होने और उचित जांच करने का आदेश दिया,। जिसकी रिपोर्ट 17 अप्रैल तक पेश की जानी है।
शख्स की मृत पत्नी के वापस आ जाने से मामले ने बेहद पेचीदा मोड़ ले लिया है।. अब सवाल है कि, बेट्टाडापुरा में जिस महिला के अवशेष मिले थे वह कौन थी? क्या आखिरकार कोई हत्या हुई थी?

एडवोकेट पुजारी ने अपने मुवक्किल को गलत तरीके से जेल में डाले जाने के लिए मुआवजे और जांच में हुई चूक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि, मुकदमा शुरू हुए चार साल हो चुके हैं और उनके मुवक्किल ने जेल में अपनी जिंदगी के दो साल गंवा दिए हैं। वह पीड़ित है और उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। झूठा मामला दर्ज कराने वालों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि, उस अज्ञात पीड़िता को भी न्याय मिलना चाहिए जिसका कंकाल पहले मिला था।

साभार:संतोष कुमार

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