सांसद में किसी की जात पात पूछना,जनता के नेता के साथ भेदभाव का खेला ठीक नही

विशेष संवाददाता एवं ब्यूरो

जनता को अधिकार दिलाने के लिए जाती पूछना और संसद मे नीचा दिखाने के लिए जाती पूछना बहुत फर्क है दोनो बातों मे
एक बात जनता के हित मे नियम बनाने के लिए है।

दूसरी वाली बात जनता के नेता को नीचा दिखाकर रोकने के लिए है,
जो मूर्ख लोग दिन भर
पिछड़ी अगड़ी दलित और आरक्षण की बात बोलकर आपस मे झगड़ा करते है एक दूसरे को नीचा दिखाते हैं। उनके संतोष के लिए जातिगत जनगणना बहुत जरूरी है। इसी से हमे पता चलेगा कि हमारा अधिकार वाकई में वह इंसान दबा रहा है जिसे हम शत्रु समझते है या कोई और है जो हमारा अधिकार छीन रहा है और हमे गुमराह कर रहा है,

बीजेपी सरकार नही चाहती कि लोग जागरूक बने इसीलिए लोगों को गुमराह ही रखना चाहती है। ताकी इसके द्वारा किए गए छल कपट का जनता को पता न चल सके,
जो लोग जातिगत जनगणना का गलत मतलब निकाल रहे हैं मूर्ख है सब,पछताऐंगे जब उनको उनको अधिकारो से वंचित कर दिया जाएगा।

पिछड़े और सवर्णों यदि आपस मै लड़ाई खत्म करना है तो जातिगत जनगणना का समर्थन जरूर करना होगा , और अगर ऐसे ही लड़ते रहना है एक दूसरे के साथ वो भी बिना सच्चाई जाने तो लगे रहो बीजेपी ने दोनों के लिए गू खाने की व्यवस्था की है। दोनो ही आने वाले समय मे गू खाते हुए ही मिलोगे वो भी सुअर का, मत मानो बात राहुल की और लगे रहो बीजेपी का पिछवाड़ा चाटने आखिर चाटने के लिए ही तो जन्म लिया है तुमने।
लेकिन याद रखना जब देर हो जाएगी तो कोई माई का लाल तुम्हे हक दिलाने नही आएगा।

साभार;पिनाकी मोरे

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