RSS,BJP सरकार ने पूंजीपतियों के दस लाख करोड़ कर्ज माफ कर दिए लेकिन किसानों को msp देने का वादा निभाने में दिक्कत क्यों?

विशेष
संवाददाता

पिछली बार हुए किसान आंदोलन में कथित तौर पर करीब 750 किसानों की मौत के बाद कहा गया था कि क्या वे मेरे लिए मरे थे?

पता नहीं क्यों उसे लोगों को मरता देखकर आनंद मिलता है जैसे गंगा की धारा को निर्मल बनाने की मांग के साथ आमरण-अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् प्रोफेसर जी.डी.अग्रवाल (स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद जी) तथा स्वामी निगमानंद ने भी अपने प्राण त्याग दिए लेकिन कलियुगी धृतराष्ट्र टस से मस नहीं हुआ।

देश के अन्नदाता किसानों की दशा सुधारने की मांग को लेकर जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से आमरण-अनशन पर बैठे हैं। उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है। सत्ता के नशे में चूर कलियुगी धृतराष्ट्र न देखता है न सुनता है। यदि उन्हें कुछ हो गया तो उनकी मृत्यु को हत्या ही माना जाएगा।

RSS-BJP सरकार ने पिछले पांच वर्षों में ही पूंजीपतियों के 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए हैं लेकिन किसानों को एमएसपी देने का वादा निभाने में दिक्कत क्यों है? क्या इसलिए कि किसानो मोदी और भ्रष्ट अधिकारियों को रिश्वत नहीं दे सकते? गरीबों का हक मार रही है ये सरकार

संवाद;पिनाकी मोरे

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